भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस नेतृत्व से सार्वजनिक माफी की मांग की, कहा- टिप्पणियां बिहार के स्वाभिमान और करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा मामला
पटना। बिहार और बिहारियों के साथ भगवान श्रीराम को लेकर कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम की कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इसे बिहार के लोगों के स्वाभिमान और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। सरावगी ने कहा कि कांग्रेस नेताओं की भाषा बिहार के प्रति उनकी सोच और राजनीतिक संस्कार को उजागर करती है। बिहार वह ऐतिहासिक धरती है, जिसने देश को लोकतंत्र, ज्ञान, दर्शन और सामाजिक चेतना की दिशा दी है। चाणक्य, आर्यभट्ट, भगवान महावीर, भगवान बुद्ध और लोकनायक जयप्रकाश नारायण जैसी महान विभूतियों की यह भूमि देश की गौरवशाली विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर लोकतंत्र की रक्षा और राष्ट्र निर्माण तक बिहारियों का योगदान उल्लेखनीय रहा है।
उन्होंने कहा कि बिहारियों को अयोग्य बताने वाली टिप्पणी केवल किसी व्यक्ति विशेष का अपमान नहीं, बल्कि राज्य के करोड़ों मेहनतकश लोगों, युवाओं, किसानों और मजदूरों की प्रतिभा एवं परिश्रम का अपमान है। बिहार के युवा आज देश और विदेश में अपनी योग्यता, मेहनत और प्रतिभा से राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने भगवान श्रीराम को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था, भारतीय संस्कृति और सामाजिक जीवन के आदर्श हैं। उनके प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने वाला है।
सरावगी ने कहा कि बिहार की जनता अपने स्वाभिमान और धार्मिक आस्था से समझौता नहीं करती। राज्य ने हमेशा अहंकार और अपमान की राजनीति का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया कि क्या बिहारियों का अपमान और भगवान श्रीराम की आस्था को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां पार्टी की राजनीतिक सोच का हिस्सा हैं? उन्होंने मांग की कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करें और बिहार की जनता के साथ करोड़ों रामभक्तों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। सरावगी ने कहा कि बिहार किसी की कृपा का मोहताज नहीं है। राज्य की पहचान उसकी प्रतिभा, परिश्रम, स्वाभिमान और गौरवशाली विरासत से है। बिहारियों और उनकी आस्था का सम्मान होना चाहिए।
