जिले में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता, निर्धारित दर पर सुगमता से उपलब्ध कराने का निर्देश
पटना। जिला स्तरीय उर्वरक निगरानी समिति की बैठक में जिले में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था, निर्धारित बिक्री मूल्य आदि की समीक्षा की गई। बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि जिले में सभी प्रकार के उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। वर्तमान में 10,054 मीट्रिक टन यूरिया, 4,566 मीट्रिक टन डीएपी, 1,232 मीट्रिक टन एमओपी, 7,273 मीट्रिक टन एनपीकेएस तथा 6,937 मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है।
जिलाधिकारी श्री कुंदन कुमार के निर्देश के आलोक में किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक सहज एवं सुगमता से उपलब्ध कराने के लिए बिक्री व्यवस्था, निर्धारित मूल्य एवं उर्वरक की गुणवत्ता पर सतत निगरानी रखी जा रही है। सभी उर्वरक विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे किसानों को निर्धारित मूल्य पर उनकी जरूरत के मुताबिक उर्वरक उपलब्ध कराएं तथा बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं सुव्यवस्था सुनिश्चित करें।
उर्वरक की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं अनियमित बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कृषि विभाग द्वारा लगातार जांच एवं कार्रवाई की जा रही है। 1 मई 2026 से 23 सितंबर 2026 तक जिले में कुल 281 छापेमारियां की गई हैं। जांच के दौरान अनियमितता पाए जाने पर 10 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, जबकि 3 विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 13 विक्रेताओं से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
बैठक में किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं सुविधाजनक बनाने पर विशेष जोर दिया गया। उपस्थित माननीय विधायक, दीघा श्री संजीव चौरसिया के प्रतिनिधि तथा माननीय सांसद, पाटलिपुत्र श्री रविशंकर प्रसाद के प्रतिनिधि द्वारा सुझाव दिया गया कि सभी उर्वरक दुकानों पर निर्धारित बिक्री दर की दर तालिका प्रमुखता से प्रदर्शित की जाए, ताकि किसानों को उर्वरक के निर्धारित मूल्य की स्पष्ट जानकारी मिल सके।
बैठक में यह भी कहा गया कि उर्वरक दुकानों पर किसानों को अनावश्यक रूप से लंबी कतार में खड़ा न रहना पड़े। इसके लिए विक्रेताओं द्वारा व्यवस्थित एवं सुचारु बिक्री व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे किसानों को समय पर और बिना किसी परेशानी के उनकी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध हो सके। जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा किसानों से अपील की गई है कि वे उर्वरक निर्धारित दर पर ही खरीदें तथा खरीद की रसीद अवश्य प्राप्त करें। यदि किसी विक्रेता द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक राशि की मांग की जाती है, उर्वरक की कालाबाजारी की जाती है अथवा बिक्री में किसी प्रकार की अनियमितता की जाती है, तो इसकी सूचना संबंधित पदाधिकारी को तत्काल दें।
