सरस मेला परिसर में जीविका के उत्पादों को वृहत बाजार तक पहुँच हेतु बॉयर-सेलर मीट संवाद का आयोजन।
स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को सरस मेला में मिल रहा है ग्राहकों तक पहुँचने का व्यापक मंच।
मेले में हस्त निर्मित उत्पाद, देशी व्यंजनों और रसोई से संबंधित सामग्री की जमकर खरीद-बिक्री हो रही है।
पटना – ज्ञान भवन, पटना में आयोजित बिहार सरस मेला-2026 जीविका दीदियों के साथ ही अन्य प्रदेशों से आए महिला उद्यमियों के लिए बाजार उपलब्ध कराने का एक बड़ा राष्ट्रीय मंच बन गया है। सरस मेला में उन्हें अपने उत्पाद की वाजिब कीमत के साथ ही ग्राहकों से मान-सम्मान और उनके उत्पादों को लेकर उचित प्रतिक्रिया तथा सुझाव भी भरपूर मिल रहा है। अन्य राज्यों के स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएँ बिहार सरस मेला में आकर अभिभूत हैं। महिला उद्यमियों का कहना है कि उनके प्रदेश के शिल्प और स्वाद को इतना मान-सम्मान और मांग शायद ही कहीं और मिलती है।
बिहार सरस मेला में झारखण्ड,उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश,हरियाणा, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, पंजाब, असम, पश्चिम बंगाल, गुजरात, कर्नाटक, मणिपुर, मध्य प्रदेश, तेलंगाना,राजस्थान, जम्मू-कश्मीर आदि राज्यों की महिला उद्यमी शिरकत कर रही हैं l बिहार सरस मेला ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) द्वारा ज्ञान भवन, पटना में 29 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। मेले में 15 राज्यों के उत्पाद, परिधान, शिल्प और व्यंजन बिक रहे हैंl
राजस्थान के चुरू जिला के बारा सर्वदा गांव की पुष्पा देवी के स्टॉल पर विशेष भीड़ देखी जा रही है। पुष्पा देवी पहली बार बिहार सरस मेला में आई हैं। वे महिला शक्ति स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। पुष्पा देवी सरस मेला में खुद के द्वारा निर्मित किचन में नाश्ता, भोजन, चाय, कॉफी आदि बनाने के आइटम यथा कढ़ाही, तवा, चूल्हा, बेलन, कुकर, कड़छी, चिमटा आदि लेकर आई हैं। इनके उत्पाद लोहे से बने मजबूत, टिकाऊ और किफायती हैं, इसलिए इनकी मांग मेले में खूब बढ़ी है। चार दिनों में पुष्पा देवी के स्टॉल से लगभग ढाई लाख रुपये से अधिक के उत्पादों की बिक्री हो चुकी है। अकेले बुधवार को उनके स्टॉल से 82 हजार रुपये से अधिक कीमत के उत्पाद बिके हैं। पुष्पा देवी ने बताया कि जीविका द्वारा आयोजित सरस मेला ने उन्हें जो मंच दिया है, उससे उनकी आमदनी तो बढ़ी ही है, साथ ही आत्मविश्वास भी कई गुना बढ़ा है।
कमोबेश सभी स्टॉल से उत्पादों की जमकर बिक्री हो रही है। आगंतुकों के लिए घर-गृहस्थी की जरूरत के सभी सामान एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। चाहे खादी के कपड़े हों, सिक्की-मधुबनी शिल्प हो, अचार-पापड़ हो या मिलेट्स और मखाना, हर स्टॉल पर ग्राहकों की भीड़ है।
ग्रामीण उत्पादों के प्रति लोगों की दीवानगी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चार दिन में खरीद-बिक्री का आंकड़ा 1 करोड़ रुपये पार कर गया है। मेले के चौथे दिन बुधवार को अकेले 30 लाख 48 हजार रुपये से अधिक का व्यवसाय हुआ। इस दिन 28 हजार से अधिक लोगों ने मेले का भ्रमण किया। बड़ी संख्या में लोगों का आना सरस मेला और उसमें बिक रहे उत्पादों और व्यंजनों के प्रति उनकी दीवानगी को दर्शाता है। आयोजन के पांचवे दिन 24 सितंबर 2026 को भी बड़ी संख्या में लोगों की खरीददारी जारी है l
सरस मेले में खरीद-बिक्री के साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग, बाजार, क्रेता और विपणन पर प्रतिदिन क्रेता-विक्रेता संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। प्रतिदिन की भांति गुरुवार को भी ज्ञान भवन के सरस मेला परिसर के सभागार में जीविका एवं अर्नेस्ट एंड यंग के तत्वाधान में आयोजित क्रेता-विक्रेता (बॉयर–सेलर मीट) संवाद कार्यक्रम में जीविका दीदियों द्वारा बनाए जा रहे उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और विपणन को लेकर गहन मंथन हुआ। आज के संवाद में शिल्पकारी, गोमती रूट्स, ग्रीन लूप प्लेटफॉर्म इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मनीगाछी मिडास किसान उत्पादक समूह ने बॉयर–सेलर मीट संवाद में भाग लिया।
इस दौरान मखाना, चावल, बैग, भुजा, गपशप, आता, सत्तू, महानंदा चायपति, मक्का और हस्त निर्मित जैसे उत्पादों की खरीद–बिक्री, बाजार से जुड़ाव उत्पादों के पैकेजिंग-लेबलिंग, जीएसटी अनुपालन, ऑनलाइन बिक्री और निर्यात की संभावनाओं पर अपना महत्वपूर्ण सुझाव दिया तथा उन्होंने इन उत्पादों की खरीद हेतु भी विशेष रुचि दिखाई। इन संस्थाओं से पधारे विशेषज्ञों ने कहा कि बिहार के ग्रामीण उत्पादों में वह दम है कि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकते हैl
सरस मेला परिसर में बैंक सखी दीदी के द्वारा ग्राहक सेवा केंद्र भी संचालित किया जा रहा है l यहाँ रुपयों की जमा निकासी हो रही है l सभी स्टॉल पर डिजिटल लेनदेन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है जिससे ग्राहकों को खरीददारी में सुविधा हो रही है l सरस मेला ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रहा है, जहां हर बिक्री के साथ एक ग्रामीण महिला के आत्मनिर्भर बनने की कहानी जुड़ी है।
