बेरोजगार युवा, परेशान किसान और महंगाई से त्रस्त जनता पूछ रही है—25 साल में हमारे हिस्से क्या आया?
रांची। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्तामें 25 वर्ष पूरे होने पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि 25 साल सत्ता के केंद्र में रहने का जश्न मनाने से पहले प्रधानमंत्री को देश की जनता के सामने अपने वादों, दावों और फैसलों का हिसाब देना चाहिए। कमलेश ने कहा कि लोकतंत्र में लंबे समय तक सत्ता में बने रहना अपने आप में उपलब्धि का प्रमाण नहीं है। असली कसौटी यह है कि युवा को रोजगार मिला या नहीं, किसान की आय बढ़ी या नहीं, गरीब को राहत मिली या नहीं और आम परिवार की जिंदगी महंगाई से आसान हुई या नहीं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से 10 सीधे और तीखे सवाल पूछे—
1. रोजगार के वादे का हिसाब कहाँ है? देश का युवा डिग्री लेकर रोजगार की तलाश में भटक रहा है। प्रधानमंत्री बताएं कि रोजगार को लेकर किए गए बड़े-बड़े दावों का वास्तविक हिसाब जनता के सामने कब रखा जाएगा?
2. किसान की आय दोगुनी हुई या सिर्फ वादा? किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया गया था। आज सरकार बताए कि किसान की वास्तविक आय कितनी बढ़ी और इस वादे की जवाबदेही कौन लेगा?
3. महंगाई से जनता को राहत कब मिलेगी?
रसोई से लेकर शिक्षा और इलाज तक बढ़ते खर्च ने आम परिवार के बजट पर दबाव बढ़ाया है। प्रधानमंत्री बताएं कि महंगाई से राहत के उनके दावों का असर आम आदमी की जिंदगी में कहाँ दिखाई देता है?
4. युवाओं के भविष्य का जिम्मेदार कौन?
पेपर लीक, भर्ती में देरी और परीक्षाओं की अनिश्चितता ने लाखों युवाओं को परेशान किया है। सरकार बताए कि ऐसी व्यवस्था के लिए जिम्मेदारी तय करने में बार-बार देरी क्यों होती है?
5. छोटे कारोबारियों को राहत कब?
छोटे व्यापारी और एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। सरकार बताए कि बड़े आर्थिक फैसलों के बाद छोटे कारोबारियों की समस्याओं को दूर करने के लिए क्या ठोस और पारदर्शी कदम उठाए गए?
6. आर्थिक विकास का लाभ आम आदमी की जेब तक कितना पहुँचा?
बड़ी अर्थव्यवस्था के दावों के बीच सवाल यह है कि आम नागरिक की आय, बचत और क्रय शक्ति में कितना वास्तविक सुधार हुआ? सिर्फ अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ने से घर का चूल्हा नहीं चलता।
7. सरकार जवाबदेही से क्यों बचती है?
लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है। प्रधानमंत्री बताएं कि संसद और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए?
8. संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सरकार इन सवालों का स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब देश के सामने रखे।
9. 25 साल में जनता को नतीजे मिले या सिर्फ नारे?
‘विकास’ और ‘परिवर्तन’ के बड़े दावों को रोजगार, किसान की आय, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के ठोस परिणामों के साथ साबित करने की जिम्मेदारी सरकार की है।
10. 25 साल का जश्न होगा या 25 साल का हिसाब?
कमलेश ने कहा कि प्रधानमंत्री को यह तय करना होगा कि वे केवल उपलब्धियां गिनाएंगे या अधूरे वादों, नाकाम नीतियों और जनता के सवालों का भी जवाब देंगे। लोकतंत्र में जनता मालिक है और सत्ता को जनता के प्रति जवाबदेह होना ही पड़ेगा।
“जनता प्रचार नहीं, परिणाम चाहती है”
केशव महतो कमलेश ने कहा कि देश पोस्टर, प्रचार और भाषणों से नहीं चलता; देश रोजगार, किसान की खुशहाली, मजदूर की मजदूरी, मध्यम वर्ग की बचत और आम आदमी की क्रय शक्ति से चलता है।
उन्होंने कहा कि 25 साल सत्ता में रहने के बाद भी यदि युवा रोजगार मांग रहा है, किसान अपनी आय को लेकर चिंतित है और आम परिवार महंगाई से जूझ रहा है, तो सवाल पूछे जाएंगे।
“सत्ता कितनी भी बड़ी हो, लोकतंत्र में जनता के सवालों से बड़ी कोई कुर्सी नहीं होती। प्रधानमंत्री 25 साल का जश्न जरूर मनाएं, लेकिन देश की जनता को 25 साल का हिसाब भी दें।”
