शोध से सशक्त होगी जनजातीय शिक्षा : पटना में 5 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
राज्य के 25 जनजातीय विद्यालयों में पठन-पाठन, लेखन, गणित और भाषाई दक्षता की होगी जांच; गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए एससीईआरटी में पांच दिवसीय कार्यशाला आयोजित
पटना। जनजातीय विद्यार्थियों की शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने और उनकी शैक्षणिक दक्षता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), महेंद्रू और बिहार अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में पांच दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई है। ‘शोध से सशक्त जनजातीय शिक्षा’ कार्यक्रम के तहत एससीईआरटी परिसर में तीन नवंबर से शुरू हुई इस कार्यशाला का समापन शनिवार को होगा। कार्यशाला में जनजातीय विद्यार्थियों की शैक्षणिक दक्षता का आकलन करने के लिए शोध अभिकल्प (रिसर्च डिजाइन) तैयार करने और मूल्यांकन उपकरण (टूल डेवलपमेंट) विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस शोध का मुख्य उद्देश्य राज्य के विभिन्न जिलों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित सभी 25 जनजातीय विद्यालयों के विद्यार्थियों की शैक्षणिक स्थिति का आकलन करना है।
इसके तहत विद्यार्थियों की पढ़ने, लिखने, गणितीय क्षमता और भाषाई दक्षता की जांच की जाएगी। इससे उनकी सीखने की क्षमता, शैक्षणिक उपलब्धियों और सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी। शोध के माध्यम से विद्यार्थियों के अधिगम स्तर को बेहतर बनाने के लिए मातृभाषा और स्थानीय संस्कृति पर आधारित बहुभाषी शिक्षा पद्धति अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज और प्रभावी बनाना तथा उनके अधिगम परिणामों में गुणात्मक सुधार लाना है। कार्यशाला में एससीईआरटी के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों के अलावा राज्य के विभिन्न शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों के प्राचार्य, व्याख्याता और विषय विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। सभी प्रतिभागी शोध की रूपरेखा, मूल्यांकन प्रक्रिया और इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अपने सुझाव एवं योगदान दे रहे हैं।
- 25 विद्यालयों का आकलन: राज्य के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित सभी 25 जनजातीय विद्यालयों के विद्यार्थियों की शैक्षणिक स्थिति की जांच की जाएगी।
- दक्षता की जांच: छात्रों के पठन-पाठन, लेखन, गणित और भाषाई कौशल को बेहतर बनाने के लिए ‘रिसर्च डिजाइन’ और ‘इवैल्यूएशन टूल’ तैयार किए जा रहे हैं।
- बहुभाषी शिक्षा पर जोर: बच्चों की सीखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए उनकी मातृभाषा और स्थानीय संस्कृति पर आधारित बहुभाषी शिक्षा पद्धति अपनाई जाएगी।
