ऑनलाइन कोचिंग, परीक्षा प्रणाली और विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली की समीक्षा; 211 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोलने की पहल पर भी हुई चर्चा
पटना। बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और प्रभावी बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने ऑनलाइन कोचिंग की गुणवत्ता, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सुधार और शोध-अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। वे अपने कार्यालय कक्ष में उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे। बैठक में ऑनलाइन कोचिंग की गुणवत्ता, परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों के मानक, उत्तर व्यवस्था, सरकारी एवं निजी विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक प्रगति और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन सहित उच्च शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान विभागीय अधिकारियों ने अध्यक्ष के समक्ष योजनाओं और उपलब्धियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
अधिकारियों ने बताया कि बिहार ने वर्ष 2023 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को अंगीकृत किया है। इसके क्रियान्वयन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के तहत स्वीकृत राशि का उपयोग विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शोध, आधारभूत संरचना के विकास, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार और अकादमिक उन्नयन के लिए किया जाना है। बैठक में राज्य की अकादमियों, परिषदों और अन्य शैक्षणिक संस्थाओं के कामकाज की भी समीक्षा की गई। कुल सात अकादमियों और 11 अन्य इकाइयों की गतिविधियों, शोध कार्यों तथा प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विचार-विमर्श हुआ।
निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को लेकर अधिकारियों ने बताया कि निर्धारित प्रक्रिया को सरल और मानक आधारित बनाया गया है। इसके तहत 10 एकड़ भूमि, निर्धारित फंड और अन्य अनिवार्य शर्तों की पूर्ति के आधार पर निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना का प्रावधान है। बैठक में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना, 211 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोलने की पहल और सरस्वती विद्या निकेतन को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने से संबंधित प्रयासों की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इन पहलों से विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है। इससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और छात्राओं को लाभ पहुंचने की उम्मीद है। विभागीय प्रतिवेदन के अनुसार, उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) राष्ट्रीय औसत से करीब तीन प्रतिशत अधिक है।
बैठक में कायाकल्प योजना के तहत आवंटन, बालिकाओं के लिए पोशाक एवं छात्रवृत्ति तथा मध्याह्न भोजन योजना के क्रियान्वयन की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इन योजनाओं से प्राथमिक शिक्षा में नामांकन, उपस्थिति और पढ़ाई जारी रखने को प्रोत्साहन मिला है। वंचित वर्गों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के संबंध में बताया गया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पात्र वर्गों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा एवं पीएचडी के लिए चार वर्षों तक प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था है।
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया जाना चाहिए। प्रश्नपत्रों का स्तर, प्रश्नों की गुणवत्ता और उत्तर व्यवस्था निर्धारित शैक्षणिक मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने ऑनलाइन कोचिंग की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में आधारभूत संरचना के विकास कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने शोध एवं अनुसंधान को प्रोत्साहित करने, नवाचार को बढ़ावा देने और शैक्षणिक संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया। अध्यक्ष ने कहा कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक हित सर्वोच्च प्राथमिकता में होने चाहिए। इसके लिए संस्थानों में शैक्षणिक अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था में निरंतर सुधार जरूरी है।
उन्होंने उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और शैक्षणिक आधारभूत संरचना के विस्तार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के प्रत्येक क्षेत्र के विद्यार्थियों को समान शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। बैठक में बिहार विधानसभा सचिवालय के प्रभारी सचिव श्री संजय कुमार सिंह, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री राजीव रौशन, निदेशक प्रो. एन.के. अग्रवाल सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।
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- पारदर्शिता पर जोर: अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने ऑनलाइन कोचिंग की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और प्रश्नपत्रों व उत्तर व्यवस्था के स्तर को अधिक विश्वसनीय बनाने के निर्देश दिए।
- शोध को बढ़ावा: विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में बुनियादी ढांचे के समयबद्ध विकास और शिक्षण संस्थानों में रिसर्च (शोध) व इनोवेशन (नवाचार) की संस्कृति को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।
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- राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020: अधिकारियों ने बताया कि बिहार ने वर्ष 2023 में ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) को अपना लिया है और इसमें यूजीसी (UGC) के मानकों का पालन किया जा रहा है।
- पीएम-उषा (PM-USHA) योजना: इस अभियान के तहत मिलने वाले अनुदान का उपयोग विश्वविद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, रिसर्च और शैक्षणिक गुणवत्ता को सुधारने के लिए किया जाएगा।
- अकादमियों की समीक्षा: बैठक में कुल 7 अकादमियों और 11 अन्य इकाइयों के कामकाज, प्रशासनिक व्यवस्था और शोध गतिविधियों की समीक्षा की गई।
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- पलायन में कमी: राज्य के 211 प्रखंडों (Blocks) में डिग्री कॉलेजों की स्थापना की पहल और नए विश्वविद्यालयों के खुलने से छात्रों के दूसरे राज्यों में होने वाले पलायन में कमी आई है।
- निजी विश्वविद्यालय के नियम: प्राइवेट यूनिवर्सिटी की स्थापना की प्रक्रिया को सरल और मानक आधारित बनाया गया है। अब इसके लिए 10 एकड़ भूमि, निर्धारित फंड और अनिवार्य मानकों को पूरा करना आवश्यक होगा।
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- महिलाओं का दबदबा: उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा सुधार हुआ है। बिहार में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात (GER) राष्ट्रीय औसत से लगभग 3 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया है।
- पीएचडी प्रोत्साहन राशि: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पात्र छात्रों को उच्च शिक्षा तथा पीएचडी के लिए चार वर्षों तक प्रतिवर्ष 10,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
- प्राथमिक शिक्षा को सपोर्ट: कायाकल्प योजना के तहत आवंटन के साथ-साथ बालिकाओं के लिए पोशाक, छात्रवृत्ति और मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) जैसी योजनाओं से स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति और निरंतरता बढ़ी है।
